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लेबनान युद्ध में अजीब तर्क

द्वारा डैनियल पाइप्स
न्यूयार्क सन्
15 अगस्त, 2006

मौलिक अंग्रेजी सामग्री: Strange Logic in the Lebanon War

हिन्दी अनुवाद-अमिताभ त्रिपाठी

इजरायल के साथ युद्ध में हिजबुल्लाह का पक्ष लेते हुए प्रतिष्ठित प्रेस संगठनों ने अनजाने में युद्ध नीति के संबंध में तर्कों के संबंध में कुछ मूलभूत परिवर्तन कर दिये.

उनके द्वारा किये गए कार्यों के उदाहरण इस प्रकार हैं-

उसने कहा कि अपने व्यक्ति का घायल होना बड़ा नैतिक आधार बन सकता है . इन सभी प्रेस और प्रसारण गतिविधियों का आधार यह धारणा है कि अधिकाधिक क्षति और पीड़ित दिखने से युद्ध में उसका पक्ष सशक्त होता है . उदाहरण के लिए हाजी का तथ्यों को तोड़ना मरोड़ना ,सोच समझ कर किया गया कार्य था ताकि इजरायल की छवि को नुकासान पहुंचाया जाये .आंतरिक कलह निर्माण की जाए, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश के पक्ष को कमजोर बनाया जाये और सरकार पर इस बात के लिए दबाव डाला जाए कि वह लेबनान पर आक्रमण रोके .

परंतु इस प्रकार प्रत्येक पक्ष द्वारा अपनी पीड़ा और क्षति को उजागर करने की प्रवृत्ति उस ऐतिहासिक क्रम को परे हटाती है जहां प्रत्येक पक्ष स्वयं को अधिक क्रूर , कठोर और विजयी के रुप में प्रदर्शित कर शत्रु को भयभीत करता था . उदाहरण के लिए द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका के युद्ध सूचना विभाग ने युद्ध के प्रथम दो वर्षों में मृत अमेरिकी सैनिकों के चित्र या फिल्म दिखाने को प्रतिबंधित कर दिया गया था जिसे बाद में कुछ हद तक हटा लिया गया था .इस बीच सचल चलचित्र ब्यूरो ने “जापानी हमारे शत्रु ” जैसी फिल्मों का निर्माण कर जापानियों के मृत शरीर और जापानियों की अभावग्रस्तता को दिखाया .

अपनी कुशलता का बखान और शत्रु को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति मिस्र के दीवार चित्रण , ग्रीक कला , अरबी काव्य , चीनी चित्रकारी , अंग्रेजी गायन और रुसी थियेटर के समय से लाखों वर्षों से चली आ रही है .आखिर लड़ाकों ( और प्रेस के उनके सहयोगियों ) ने इस वर्षों पुरानी और वैश्विक परिपाटी को महत्वहीन बताकर शत्रु को बढ़ावा देना क्यों आरंभ कर दिया .

ऐसा अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा असाधारण शक्ति उपभोग के कारण हुआ है .जैसा कि इतिहासकार पाल कैनेडी ने 2002 में कहा था – “ सैन्य अर्थों में केवल एक शक्ति है जिसकी गिनती की जा सकती है , पिछले समय को देखकर उन्होंने पाया , इससे पहले शक्ति का इतना असंतुलन कभी नहीं देखा गया और इजरायल अपनी क्षमता में एक क्षेत्रीय शक्ति और वाशिंगटन के निकट सहयोगी के तौर पर संख्या पर संख्या के संबंध में हिजबुल्लाह के समकक्ष है.”

ऐसी शक्ति के साथ अंतर्निहित है कि जब पश्चिम किसी गैर-पश्चिम से युद्ध करता है तो युद्ध भूमि का परिणाम पता होता है .वह पहले ही तय हो जाता है और यह युद्ध एक परंपरागत युद्ध के स्थान पर एक पुलिस का छापा अधिक लगता है .पुलिस छापे की भांति ही आधुनिक युद्ध का आकलन उसकी वैधानिकता , शत्रुता की अवधि , सेना के अनुपात ,क्षति की गंभीरता और आर्थिक तथा पर्यावरणिक क्षति की सीमा से किया जाता है .

ये सभी बहस के विषय हैं और उन पर इस स्तर तक बहस होती है कि गुरुत्वकेन्द्र युद्धभूमि से हटकर संपादकीय पृष्ठों और चर्चा करने वालों के मस्तिष्क में चला गया है .वास्तव में युद्ध कैसे लड़ा जाता है इससे अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि यह दिखता कैसा है .इस नई वास्तविकता में अंतर्निहित संदेश है कि पश्चिमी सरकारें चाहे ईराक में अमेरिका हो या लेबनान में इजरायल उन्हें जनसम्पर्क को भी अपनी रणनीति के रुप में देखना होगा . हिजबुलल्लाह ने इस नये तथ्य को अंगीकार कर लिया है परंतु ये सरकारें ऐसा नहीं कर पाई हैं .

सम्बन्धित विषय:  अरब इजारायल संघर्ष और कूटनीति, मीडिया, लेबनान डैनियल पाइप्स की साप्ताहिक हिन्दी ई-मेल सूची के नि:शुल्क सदस्य बनें