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द्वारा डैनियल पाइप्स और पैट्रिक क्लासन
न्यूयार्क पोस्ट
20 मई, 2003
मौलिक अंग्रेजी सामग्री: [Mujahedeen-e Khalq:] A Terrorist U.S. Ally?
हिन्दी अनुवाद - अमिताभ त्रिपाठी
इन दिनों इराक से एक ईरानी विरोधी गुट मजाहिदीने – खल्क के सम्बन्ध में अजीब समाचार आ रहे हैं। यह अमेरिकी सरकार द्वारा चिन्हित आतंकवादी संगठन है जिस पर गठबन्धन सेनाओं ने सर्वप्रथम हवा से बमबारी की और युद्ध विराम का समझौता किया और अन्त में इसे नि:शस्त्र कर इसकी रक्षा की। मुजाहिदीने – खल्क परम्परागत पश्चिम विरोधी गुट नहीं है। परन्तु एक ऐसा संगठन है जिसका पश्चिमी राजधानियों में गहरा राजनीतिक असर है, इराक में इसके 3,000 सैनिक तैनात हैं और यह एकमात्र उद्देश्य के प्रति समर्पित है कि इस्लामी गणतन्त्र ईरान नामक अपने कट्टर शत्रु को अपदस्य करना।
निश्चित रूप से 17 वर्ष के इराक काल में इसे सद्दाम हुसैन की आज्ञा का पालन भी करना पड़ा। यह एक स्थिति अनेक प्रश्न खड़े करती हैं –
क्या मुजाहिदीने खल्क आतंकवादी संगठन है – नहीं, इसने दशकों पहले आतंकवाद का प्रयोग किया जब इसके सदस्यों ने अमेरिकनों पर हमला किया। पिछले 15 वर्षों में यद्यपि मुजाहिदीने खल्क एक सेना की भाँति संगठित हुआ परन्तु इसकी हिंसक गतिविधि केवल ईरानी शासन के प्रति रही। हिजबुल्लाह के विपरीत ( जो यहूदी सामुदायिक केन्द्रों को निशाना बनाता है और रिहाइशी इलाकों में राकेट दागता है ) मुजाहिदीन स्पष्ट रूप से शासन के लक्ष्यों को निशाना बनाता है। पी.एल.ओ के विपरीत ( जिसके नेता अभी हाल तक आतंकवादी थे और तर्क से आज भी हैं ) मुजाहिदीन ने यह बर्बर नीति पहले ही छोड़ दी है।
क्या मुजाहिदीने खल्क इराक को मुक्त करा सकता है ? नहीं, एक सेना के द्वारा आक्रमण की नीति सफल नहीं हो सकती। ईरान में जब लोकतान्त्रिक शक्तियाँ इसके गलत मजहबी शासन को किनारे कर देगी तभी यह समाप्त होगा। विदेशी केवल स्वतन्त्र देशों में निवास करने वाले ईरानियों को सेटेलाइट टेलीविजन के द्वारा प्रेरित कर सकते हैं ( जैसा कि अमेरिका के सीनेटर सैम ब्राउनबैक ने हाल में ही प्रस्ताव किया है )
क्या मुजाहिदीने खल्क उपयोगी हो सकता है ? हाँ, पश्चिमी गुट मानवीय खुफिया की दृष्टि से कम हैं अर्थात् आसमान में आँखें अधिक हैं। गठबन्धन सैन्य कमाण्डरों को मुजाहिदीने खल्क से इराक में उपस्थित ईरानी मुल्लाओं के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। मुजाहिदीने खल्क ईरान की गतिविधियों के सम्बन्ध में भी जानकारी उपलब्ध करा सकता है जहाँ अतिशयोक्ति के पश्चात भी बड़ी घटनाओं की सम्भावना रहती है। उदाहरण के लिए 2002 के मध्य में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के सम्बन्ध में इसकी जानकारी अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी से बेहतर थी जिसके आधार पर जाँच करने पर अमेरिकी प्रशासन को पुष्ट हुआ कि परमाणु बम का निर्माण करने की दिशा में ईरानी किस प्रकार आगे बढ़ चुके हैं।
मुजाहिदीने खल्क के सम्बन्ध में वाशिंगटन में चुपचाप काफी गहरी बहस हो चुकी है। ईरानी नरमपंथियों की सहानुभूति अर्जित करने के लिए 1997 में राज्य विभाग ने इसे विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किया। यद्यपि कांग्रेस के 150 सदस्यों ने सार्वजनिक रुप से इसका विरोध किया परन्तु अमेरिका के कोर्ट ऑफ अपील ने हाल में इसे बहाल कर दिया।
दृष्टिकोण में इस जबर्दस्त भिन्नता से वाशिंगटन की बाद की नीतियों की ब्याख्या होती है। 15 अप्रैल को अमेरिका की सेना ने मुजाहिदीने खल्क के साथ एक युद्ध विराम पर समझौता किया और इराक में ईरानी शासन द्वारा घुसपैठ की स्थिति में हथियार रखने की छूट प्रदान कर दी। इस समझौते से राज्य विभाग असन्तुष्ट हुआ और उसने राष्ट्रपति को इसे बदलने के लिए मना लिया। इसके बाद 9 मई को विचित्र स्थिति उत्पन्न हुई जब अमेरिकी सेनाओं ने मुजाहिदीने खल्क के शिविर को घेर लिया और इनके लड़ाकों को निशस्त्र कर उनकी रक्षा के लिए अपनी-अपनी जगह ले ली।
यह एक बुरा विचार है। गठबन्ध सेना को इराक में अन्यत्र व्यवस्था बनाने का तत्काल प्रयास करना चाहिए। और राज्य यह स्वप्न देख रहा है कि यदि मुजाहिदीने खल्क की रक्षा करने से ईरानी मुल्ला पिघल जायेंगे।
इसके बजाय अमेरिकी सेना को संस्तुति करनी चाहिए कि मुजाहिदीने खल्क के सदस्यों को ईरानी प्रतिद्वन्द्वियों से रक्षा के लिए पर्याप्त शस्त्र देने चाहिए। और नवम्बर में जब अगले राज्य सचिव इस बारे में निर्णय करें कि मुजाहिदीने खल्क को आतंकवादी गुट के रुप में फिर माना जाये या नहीं तो उन्हें बुद्धिमता पूर्ण निष्कर्ष पर आना चाहिए कि यह गुट अमेरिका, उसके नागरिकों के लिए कोई खतरा उत्पन्न नहीं करता इसलिए इसे विदेशी आतंकवादी संगठन की सूची से हटा दिया जाना चाहिए। अन्त में चूंकि ईरान के मुल्ला अतार्किक ढंग से मुजाहिदीने खल्फ से भयभीत हैं ( 1988 में जेल में बन्द मुजाहिदीने खल्फ के 10,000 सदस्यों का नरसंहार ) और यह देखते हुए कि मुजाहिदीने खल्क एक संगठित गुट के रूप में इराक के विभिन्न शिविरों में उपस्थित हैं एक विलक्षण अवसर प्रदान करता है कि तेहरान पर दबाव बनाया जाये और डराया जाये।
मुल्लाओं को शत्रुवत कदम उठाने से रोकने के लिए ( इराक में गठबन्ध सेनाओं के विरूद्ध आतंकवाद का समर्थन, परमाणु हथियार का निर्माण ) यह अत्यन्त प्रभावी कदम होगा कि उन्हें धमकाया जाये कि अमेरिका मुजाहिदीने खल्क से मिल रहा है या फिर शासन विरोधी अभियान को सार्वजनिक रूप से सहायता कर रहा है।
सम्बन्धित विषय: अमेरिका की विदेश नीति, आतंकवाद, ईराक, ईरान डैनियल पाइप्स की साप्ताहिक हिन्दी ई-मेल सूची के नि:शुल्क सदस्य बनें