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मेरी निराशा - 10 सितंबर की ओर वापसी

द्वारा डैनियल पाइप्स
न्यूयार्क सन्
20 दिसंबर, 2005

मौलिक अंग्रेजी सामग्री: My Gloom: Back to September 10
हिन्दी अनुवाद - अमिताभ त्रिपाठी

अमेरिका के बहुत से लोगों के विपरीत 11 सितंबर 2001 के हमलों ने मुझे अधिक सुरक्षित बना दिया है .अंत में देश ने उन मुद्दों की ओर ध्यान दिया जिन्होंने लंबे अरसे से मुझे चिंतित कर रखा था.

2001 के अंत में मैंने लिखा था “ एफ.बी.आई अपने इतिहास के सबसे बड़े ऑपरेशन में लगी है . ” फिर सेना के जवान अमेरिका के एयर क्राफ्ट से उड़ते दिखेंगे , आप्रवासी सेवाओं ने विदेशी विद्यार्थियों के ऊपर बारीक नजर रखनी शुरु कर दी है . मैं उस समय सुरक्षित अनुभव कर हा हूं, जब इस्लामवादी संगठनों की पोल कुल रही है. धन के प्रवाह पर रोक लगाई जा रही है तथा आप्रवासी विनियामकों का पुनर्परीक्षण हो रहा है . इराक और अफगानिस्तान के निकट अमेरिका की सेनाओं का जमवड़ा मुझे प्रसन्न करता है . यह नई सजगता काफी स्वस्थ है , एक जुटता की यह भावना सुखद है और यह संकल्प उत्साहवर्धक है . लेकिन मैंने पीड़ा व्यक्त की थी कि यदि यह समाप्त हो जायेगा “ क्या वास्तव में अमेरिका के लोग अपनी स्वतंत्रता का परित्याग करने को तैयार हैं या फिर कट्टरपंथी इस्लाम के विरुद्ध युद्ध में लोगों को सजा दिलाने को प्रतिबद्ध हैं .मुझे अमेरिका की निरंतरता और उसके उद्देश्य को लेकर चिंता है ”

मेरी चिंता जायज थी क्योंकि 2001 के अंत का संकल्प , सजगता , एकजुटता बाद में समाप्त हो गई तथा हम पुन: 11 सितंबर से पूर्व की मानसिकता पर लौट आए . अमेरिका के भीतर हाल की कुछ घटनाओं ने मुझे निराशावादी बना दिया है .

इसके बाद अमेरिका की विदेशनीति –

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ झटके

रुडोल्फ गिलीयानी ने चिंता प्रकट की है कि हम आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध में पिछड़ रहे हैं. एन्ड्रयू मैककार्थी ने निष्कर्ष निकाला है कि 10 सितंबर की भावना जीवित है. स्टीवन इमर्सन ने मुझे बताया कि 11 सितंबर से पहले की राजनीतिक स्थिति ने स्वयं को प्रभावी बना लिया है .

मुझे इस बात की चिंता है कि कोई भी आकस्मिक आतंकवादी घटना भी असंवेदनशील पश्चिम को 11 सितंबर के पश्चात् की सजगता , एकजुटता और संकल्प पर नहीं पहुंचा सकेगी .

जॉन केरी की आतंकवाद की धारणा कि यह वेश्यावृत्ति और जुआ के समान एक बुराई है ने प्रभाव बना लिया है . उन्होंने सुझाव दिया है कि भविष्य की आतंकवादी घटनाओं की अवहेलना कर देनी चाहिए .

यदि एक नरसंहार लोगों की आंखें खोलता भी है तो अगले चरण की सजगता तो पहले से भी अधिक अल्पकालिक होगी . लोग मानते हैं कि यदि कोई संकट था तो वह टल चुका है . जीवन अच्छा है , खतरा दूर है , सुरक्षा पर्याप्त दिख रही है ..चुपचाप सो जाओ...

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